मेरा नाम आर्यन है और मैं दिल्ली में रहता हूं। कॉलेज के अंतिम वर्ष में था जब मेरी जिंदगी की सबसे बुरी और सबसे अच्छी चीज एक साथ हुई। मेरी प्रेमिका रिया से मेरा ब्रेकअप हो गया था – तीसरी बार उसने मुझे धोखा दिया था और इस बार मैंने अंततः निर्णय लिया कि अब और नहीं। बेस्ट फ्रेंड के साथ मेरी पहली चुदाई ।
दो साल के रिश्ते में एक पल में अंत हो गया। रिया और मैं कॉलेज में मिले थे और शुरुआत अच्छी थी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी मांगें बढ़ती गईं और मेरा उस पर से विश्वास उठता गया। जब मैंने उसे अपने ही दोस्त के साथ पकड़ा तो दिल टूटने की आवाज सिर्फ मैं ही सुन सकता था।
उसके बाद के दिन कैसे गुजरे, मुझे आज भी ठीक से याद नहीं। मैं अपने कमरे में बंद हो गया, कॉलेज जाना बंद कर दिया, फोन उठाना बंद कर दिया। मेरे माता-पिता को लगा कि मैं किसी बीमारी में गिरा हूं, लेकिन असली बीमारी तो मेरे दिल में थी।
मेरी सबसे अच्छी दोस्त खुशी ही थी जो रोज मुझसे मिलने आती। खुशी और मैं स्कूल से दोस्त थे – लगभग सात साल की दोस्ती थी हमारी। वह हमेशा मेरी सुनती, मेरी समस्याएं समझती और मुझे सहारा देती। लेकिन उसका भी एक प्रेमी था – करण। करण और मैं भी दोस्त थे, लेकिन खुशी से ज्यादा करीब मैं था।
खुशी काफी सुंदर थी – ५’६” की ऊंचाई, गोरा रंग और एक ऐसी मुस्कान जो किसी का भी दिन बना दे। उसका फिगर औसत था, लेकिन उसकी व्यक्तित्व इतनी आकर्षक थी कि लोग उससे स्वचालित रूप से आकर्षित होते। वह हमेशा साधारण कपड़े पहनती – सलवार कमीज या जींस कुर्ते के साथ, लेकिन उसमें भी वह किसी मॉडल से कम नहीं लगती थी।
ब्रेकअप के बाद पहले हफ्ते, खुशी रोज शाम को मेरे घर आती। कभी कुछ लाती – मेरी पसंद की चाय या कुछ नाश्ता। मैं हमेशा उदास रहता और वह मेरे पास बैठकर मुझे समझाती। बेस्ट फ्रेंड के साथ मेरी पहली चुदाई
“आर्यन, तू ऐसे नहीं कर सकता। रिया की वजह से अपनी जिंदगी बर्बाद मत कर,” वह रोज कहती।
“लेकिन खुशी, मैं क्या करूं? मेरा दिल ही नहीं मान रहा कुछ करने को,” मैं रोते हुए कहता।
वह मेरा हाथ पकड़ती और मुझे गले लगाती। वह गले लगाना पहले भी होता था, लेकिन अब वह और ज्यादा सांत्वना देने वाला लगने लगा। शायद मैं भावनात्मक रूप से कमजोर था या शायद वह सचमुच मेरी मदद करना चाहती थी।
करण को लेकर कभी कोई समस्या नहीं हुई। वह जानता था कि खुशी और मेरी दोस्ती पुरानी है और वह असुरक्षित नहीं था। लेकिन मैं जानता था कि करण और खुशी के रिश्ते में भी उतनी ही जटिलताएं थीं जितनी मेरी थीं – बस वह खुलकर व्यक्त नहीं करते थे।
ब्रेकअप के बाद का तीसरा हफ्ता था। मैं अब थोड़ा बेहतर महसूस कर रहा था, लेकिन रात को नींद नहीं आती थी। उस दिन खुशी शाम को आई और मेरे साथ बैठी।
“आज करण से झगड़ा हो गया,” उसने बताया, थोड़ी परेशान लग रही थी।
“क्यों? क्या हुआ?” मैंने पूछा।
“वह कह रहा था कि मैं उससे ज्यादा तुझे समय देती हूं। बोल रहा था कि मेरी प्राथमिकताएं गलत हैं,” खुशी ने बताया।
मैं चुप हो गया। यह सच था – खुशी सचमुच मुझे ज्यादा समय दे रही थी। लेकिन मैं क्या करूं? वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी और मैं उसकी मदद के लिए कितना मना कर सकता था?
“तू जानती है न कि मैं क्या महसूस कर रहा हूं,” मैंने कहा। “मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से तुम दोनों में समस्याएं हों।”
“नहीं आर्यन, तू गलत समझ रहा है। करण को समझना चाहिए। तू मेरा दोस्त है और मैं तुझे ऐसे ही छोड़ नहीं सकती,” वह बोली।
रात के ११ बज गए थे। खुशी ने तय किया कि वह यहीं रुकेगी – मेरे माता-पिता शहर से बाहर थे और घर पर मैं अकेला था। उसने करण को संदेश कर दिया कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है और वह यहीं रुक रही है।
हम लिविंग रूम में बैठे थे, टीवी पर कोई फिल्म चल रही थी। खुशी मेरे पास आकर बैठ गई और मेरा सर अपनी गोद में रख दिया। मैंने आज तक कभी ऐसा महसूस नहीं किया था – इतनी शांति, इतना आराम।
“तुझे पता है आर्यन, मैं हमेशा से तुझसे…” वह बोलते-बोलते रुक गई।
“क्या?” मैंने पूछा।
“कुछ नहीं,” वह मुस्कुराई, लेकिन उसकी आंखों में कुछ अलग था।
मैं ऊपर उठकर बैठा और उसकी आंखों में देखा। कुछ पल के लिए हम दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे। और फिर, पता नहीं क्या हुआ, मैंने अपने हाथ उसके चेहरे पर रखे और उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। बेस्ट फ्रेंड के साथ मेरी पहली चुदाई
वह पहले तो चौंकी, लेकिन फिर उसने भी प्रतिक्रिया दी। वह चुंबन शुरुआत में धीमा था, खोजबीन करता हुआ, हिचकिचाता हुआ। लेकिन धीरे-धीरे वह जोशीला हो गया। खुशी ने अपने हाथ मेरे बालों में डाले और मुझे और ज्यादा पास खींच लिया।
“खुशी, मैं…” मैंने कुछ कहना चाहा।
“चुप, अब मत सोच कुछ,” उसने मेरे होठों पर उंगली रखकर कहा।
वह चुंबन लंबा था, तीव्र। हम दोनों की सांसें तेज हो गई थीं। मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे और उसे अपनी ओर खींच लिया। वह मेरे ऊपर आकर बैठ गई और हम चुंबन करते रहे।
खुशी ने अपने हाथ मेरी शर्ट के अंदर डाले और मेरी छाती पर सहलाने लगी। मैंने भी हिम्मत की और उसके कुर्ते के अंदर हाथ डाला। उसकी त्वचा का स्पर्श मेरे हाथों में आते ही मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया।
“आर्यन, हम… यह सही नहीं है,” उसने कहीं कहना चाहा, लेकिन उसकी शारीरिक भाषा कुछ और कह रही थी।
“खुशी, कृपया, अब रुकना मत,” मैंने कहा और उसके गले पर चुंबन करते हुए उसके कुर्ते के बटन खोलने लगा।
उसने भी मेरी शर्ट उतार दी और मेरी नंगी छाती पर अपने हाथ फिराए। हम दोनों की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। मैंने उसका कुर्ता उतार दिया और उसके काले ब्रा में उसके स्तनों को देखा। वह परफेक्ट थे – मध्यम आकार, गोल और बिल्कुल नरम।
मैंने अपना चेहरा उनके बीच में डाला और ब्रा के ऊपर से ही उन्हें चूसने लगा। खुशी ने अपने हाथ मेरे सिर पर रखे और कराहने लगी।
“आह्ह… आर्यन… धीरे…” वह चीखती।
मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और अब उसके निप्पल्स को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था। एक हाथ से मैं दूसरे स्तन को मसाज कर रहा था। खुशी की आंखें बंद थीं और वह पूरे जोश में थी।
“बेडरूम चलें?” मैंने पूछा।
वह सिर्फ हां में सिर हिलाई और मैंने उसे गोद में उठा लिया। मेरा कमरा पहली मंजिल पर था और मैं उसे लेकर ऊपर गया। रास्ते में भी हम चुंबन करते रहे।
बेडरूम में पहुंचकर मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया। वह हंस रही थी और मुझे देख रही थी जैसे कोई नशा हो उसकी आंखों में। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और धीरे-धीरे उसकी सलवार उतार दी। अब वह सिर्फ पैंटी में थी – एक सफेद कॉटन पैंटी।
मैंने अपने कपड़े भी उतारने शुरू किए। शर्ट, जींस और फिर अंडरवियर। जब उसने मेरा उत्तेजित लिंग देखा तो उसकी आंखें बड़ी हो गईं।
“कितना बड़ा है…” वह फुसफुसाते हुए बोली।
मैं उसके पास आया और उसकी पैंटी भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे, एक-दूसरे के सामने। खुशी थोड़ी शर्मा रही थी, लेकिन मैंने उसे आरामदायक महसूस कराया।
“तू बहुत सुंदर है,” मैंने कहा और उसके ऊपर आ गया।
मैंने उसके होठों पर चुंबन किया और अपना लिंग उसकी जांघों के बीच में महसूस करने लगा। वह गर्म थी और पहले से ही गीली लग रही थी। मैंने अपने एक हाथ से अपना लिंग पकड़ा और उसकी योनि पर रगड़ने लगा।
“आह्ह… डाल दे… कृपया…” वह भीख मांगने लगी।
मैंने धीरे से दबाव डाला और मेरा लिंग उसकी योनि में घुस गया। वह टाइट थी और मैं समझ गया कि करण के साथ इतना सेक्स नहीं होता होगा। मैंने धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया और वह कराहने लगी।
“ओह्ह फक… आर्यन… और जोर से…” वह चिल्लाई।
मैंने गति बढ़ाई और अब मैं उसे पूरी गति में चोद रहा था। बिस्तर की आवाजें आ रही थीं – थप थप थप। खुशी ने अपने पैर मेरी कमर पर लपेट लिए और मुझे और ज्यादा अंदर जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी।
“हां… हां… वहीं… मत रुक…” वह कह रही थी।
मैंने लगभग १५ मिनट तक उसे इसी स्थिति में चोदा। फिर मैंने स्थिति बदली – डॉगी स्टाइल में। खुशी डॉगी पोजीशन में आ गई और मैंने पीछे से उसकी योनि में अपना लिंग डाल दिया। इस स्थिति में मैं और ज्यादा गहरा जा रहा था और वह और ज्यादा कराह रही थी।
“ओह गॉड… आर्यन… तू तो… आह्ह… अमेजिंग है…” वह बोल रही थी।
मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ भी मारे और वह और ज्यादा उत्तेजित हो गई। “और जोर से… मुझे और चोद…” वह कह रही थी।
हम अलग-अलग स्थितियों में गए – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल और फिर स्पूनिंग। खुशी ने भी बहुत सक्रिय रूप से भाग लिया और मुझे बताया कि उसे क्या अच्छा लग रहा है।
जब मैं क्लाइमेक्स के करीब आया तो मैंने पूछा, “अंदर निकालूं या बाहर?”
“अंदर… कृपया… मैं गोली ले लूंगी…” वह कहती।
मैंने अपना सारा वीर्य उसकी योनि में ही छोड़ दिया। वह गर्म थी और उसके अंदर रिलीज करने का अनुभव बहुत अद्भुत था। हम दोनों थक गए थे और एक-दूसरे से चिपककर लेट गए।
सुबह जब मेरी आंख खुली तो खुशी मेरे बगल में सो रही थी। उसके बाल बिखरे हुए थे और वह बिल्कुल परी लग रही थी। लेकिन जैसे ही रात की यादें आईं, मुझे दोषी महसूस होने लगा।
“ओह गॉड, मैंने क्या कर दिया,” मैंने सोचा। “यह मेरी सबसे अच्छी दोस्त है और उसका प्रेमी भी है। मैं कितना बड़ा कमीना हूं।”
खुशी की आंख खुली और उसने मुझे देखा। पहले वह थोड़ी उलझन में थी, लेकिन फिर उसे भी सब याद आया। हम दोनों एक-दूसरे को देखे और फिर हंसने लगे।
“कल रात…” मैंने शुरू किया।
“कल रात बहुत अद्भुत थी,” खुशी ने पूरा किया। “लेकिन आर्यन, मुझे दोषी महसूस हो रहा है। करण…”
“मुझे भी दोषी महसूस हो रहा है,” मैंने कहा। “लेकिन खुशी, मैं नहीं चाहता था कि ऐसा हो। बस… पता नहीं क्या हो गया।”
“मैं जानती हूं,” वह बोली। “लेकिन अब क्या करें?”
हम दोनों चुप रहे। यह स्थिति जटिल थी – खुशी और करण का रिश्ता था, मेरी और खुशी की दोस्ती थी और अब यह नया यौनिक कोण भी था।
“शायद यह एक गलती थी,” मैंने कहा। “और हमें इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।”
खुशी ने कुछ देर सोचा और फिर बोली, “शायद तू सही कह रहा है। लेकिन आर्यन, मैं झूठ नहीं बोलूंगी – मुझे कल रात बहुत अच्छा लगा। तू अलग है और तुझके साथ वह कनेक्शन…”
“खुशी, कृपया,” मैंने उसे रोका। “अगर हम इसपे जाएंगे तो सब कुछ और जटिल हो जाएगा।”
वह मान गई, लेकिन उसकी आंखों में कुछ था – कुछ इच्छा, कुछ लालसा। हमने तय किया कि यह एक बार की बात थी और हम इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे।
खुशी ने अपने कपड़े पहने और घर चली गई। करण को उसने कैसे फेस किया होगा, लेकिन उसने मुझे नहीं बताया कि क्या हुआ। अगले कुछ दिन, हम सामान्य व्यवहार करने की कोशिश करते रहे – जैसे कुछ हुआ ही न हो।
लेकिन दिल जानता था कि कुछ बदल गया था। जब भी खुशी मेरे सामने आती, मुझे रात की यादें आ जातीं। जब वह हंसती, मुझे उसकी कराहें याद आतीं। यह नियंत्रित करना मुश्किल था।
दो हफ्ते गुजर गए। मैं कॉलेज वापस आया और अपनी दिनचर्या में लगा। खुशी से बात होती, लेकिन वह पहले जैसी नहीं थी। दोनों में एक अजीबता थी।
एक दिन, करण शहर से बाहर गया था – अपने कजिन की शादी में। खुशी ने मुझे फोन किया।
“आर्यन, तू घर पर है?” उसने पूछा।
“हां, क्यों?” मैंने पूछा।
“मैं आ रही हूं। कुछ बात करनी है।”
मुझे लगा कि शायद वह गंभीर कुछ चर्चा करना चाहती है। लेकिन जब वह आई तो उसकी हालत थोड़ी अलग थी। उसने जींस और टैंक टॉप पहना था – जो उसके लिए असामान्य था।
“क्या हुआ?” मैंने पूछा।
“आर्यन, मैं झूठ नहीं बोल सकती,” वह बोली और मेरे पास आकर बैठ गई। “मैं तुझे याद कर रही हूं। वह रात… मैं भूल नहीं पा रही।”
“खुशी, हमने तय किया था…” मैंने कहा।
“मैं जानती हूं,” उसने रोक दिया। “लेकिन आर्यन, तू समझ नहीं रहा। करण और मेरे बीच में कुछ नहीं है। वह व्यस्त रहता है और जब भी हम साथ होते हैं, वह इच्छुक नहीं होता। लेकिन तू… तू अलग है।”
मैं चुप था। मेरा भी मन था, लेकिन अंतरात्मा रोक रही थी।
“आर्यन, कृपया… एक बार और… बस एक बार,” वह भीख मांग रही थी और मेरा हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया।
मैं नियंत्रित नहीं कर सका। उसकी नरमाई, उसकी महक, सब मुझे पागल बना रहा था। मैंने उसे चुंबन करना शुरू कर दिया और वह भी प्रतिक्रिया कर रही थी।
इस बार चुंबन और ज्यादा जोशीला था। खुशी ने मेरी शर्ट उतारी और मेरी छाती पर चुंबन देने लगी। मैं उसके टैंक टॉप के अंदर हाथ डालकर उसके निप्पल्स को चिमटा रहा था।
“बेडरूम चल,” वह कहती।
मैंने उसे उठाया और बेडरूम में ले गया। इस बार पहले से ज्यादा जल्दी में थे दोनों। मैंने उसकी जींस उतारी और वह मेरे सामने सिर्फ पैंटी में खड़ी थी। मैंने अपने कपड़े भी जल्दी से उतारे।
खुशी ने मेरा लिंग हाथ में पकड़ा और उसे हिलाने लगी। “कितना कड़ा है… मुझे इसकी याद आ रही थी,” वह बोली।
मैंने उसे बिस्तर पर धक्का दिया और उसकी पैंटी उतार दी। अब वह बिल्कुल नंगी थी। मैंने अपना मुंह उसकी योनि पर रखा और चाटने लगा।
“ओह्ह… आर्यन… हां…” वह कराह रही थी।
मैंने उसकी क्लिट को अपनी जीभ से रगड़ा और वह पागल हो गई। “कृपया… अब डाल दे… मुझे और नहीं रुक सकती,” वह भीख मांग रही थी।
मैंने अपना लिंग उसकी योनि पर रखा और एक झटके में अंदर डाल दिया। वह चीखी, “आह्ह… फक… हां…”
इस बार मैं और ज्यादा आक्रामक था। मैंने उसके हाथ बिस्तर के ऊपर पकड़ लिए और जोर-जोर से चोदने लगा। “तू मेरी है… बोल… तू सिर्फ मेरी है,” मैंने हावी होते हुए कहा।
“मैं सिर्फ तेरी हूं… और किसी की नहीं… और जोर से चोद मुझे…” वह प्रतिक्रिया कर रही थी।
यह मिलन पहले से ज्यादा जंगली था। हम अलग-अलग स्थितियों में गए और खुशी ने भी बहुत सक्रिय रूप से भाग लिया। वह मुझे बताती कि उसे क्या चाहिए और मैं वही करता।
जब मैं वीर्य स्खलित करने वाला था तो मैंने उससे पूछा, “कहां छोड़ूं?”
“मेरी गांड पर… कृपया… मैं देखना चाहती हूं,” वह कहती।
मैंने अपना लिंग बाहर निकाला और उसकी गांड पर अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। वह बड़ी मात्रा में था और उसकी नरम त्वचा पर सफेद-सफेद दिख रहा था।
हम दोनों थककर लेट गए। इस बार दोषी कम था, लेकिन एहसास ज्यादा था – कि यह अब नियमित हो सकता है।
उसके बाद से, खुशी और मेरा रिश्ता बदल गया। वह आधिकारिक रूप से मेरे साथ नहीं थी – उसका प्रेमी करण था – लेकिन वह मुझे नियमित रूप से चुदवाने आने लगी।
करण को कुछ पता नहीं था। वह अपनी जिंदगी में व्यस्त था – अपने काम में, अपने दोस्तों में। खुशी ने मुझे बताया कि करण उससे भावनात्मक रूप से उपलब्ध नहीं है और शारीरिक रूप से भी उतना इच्छुक नहीं।
“वह हफ्ते में एक बार सेक्स करता है और वह भी जल्दी-जल्दी। मुझे कुछ महसूस नहीं होता,” खुशी ने बताया।
मैं समझ गया कि खुशी को क्या चाहिए था – भावनात्मक जुड़ाव के साथ शारीरिक संतुष्टि। और मैं दोनों दे पा रहा था।
हम अलग-अलग जगहों पर मिलते। कभी मेरे घर जब माता-पिता नहीं होते, कभी उसके घर जब करण शहर से बाहर होता और कभी होटलों में। हम दोनों सावधान थे कि किसी को पता न चले।
एक दिन, खुशी ने मुझे बताया कि करण ने उसे प्रपोज किया है – शादी के लिए।
“क्या? तूने क्या कहा?” मैंने हैरानी में पूछा।
“मैंने हां कह दी,” वह बोली, लेकिन उसकी आंखों में कुछ था।
“तो फिर हम… यह सब…” मैं उलझन में था।
“आर्यन, मैं करण से शादी करूंगी, लेकिन तू मेरी जरूरत है। मैं तुझसे प्यार नहीं करती – या शायद करती हूं, मुझे पता नहीं – लेकिन मुझे तू चाहिए,” वह सच बोल रही थी।
यह सुनकर मुझे अजीब सा गर्व महसूस हुआ। मैं क्या था – एक साइड पीस? लेकिन फिर मैंने सोचा कि मैं भी तो यह सब एंजॉय कर रहा हूं। खुशी ने कोई प्रतिबद्धता नहीं मांगी थी और मैंने भी नहीं दी थी। बेस्ट फ्रेंड के साथ मेरी पहली चुदाई
“ठीक है,” मैंने कहा। “जब तक तू आरामदायक है, मैं हूं।”
और वैसे ही चलता रहा। खुशी ने करण से सगाई कर ली, लेकिन वह मुझे चुदवाने आती थी। कभी-कभी तो वह सीधे करण के साथ डेट से आकर मेरे पास आती और हम सेक्स करते।
एक दिन, उसने बताया कि करण और वह अंतरंग हुए थे। “लेकिन आर्यन, मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ। मैं तुझे कल्पना कर रही थी,” वह कहती।
यह सुनकर मुझे अजीब सा गर्व महसूस हुआ। मैं खुशी के लिए विशेष था, चाहे वह आधिकारिक रूप से किसी और की हो।
हमने रोल प्ले भी आजमाए – टीचर-स्टूडेंट, डॉक्टर-पेशेंट, बार में अजनबी। हर कल्पना में वह पूरी तरह से शामिल होती और मुझे और ज्यादा मजा आता।
भाग ६: जंगली मुलाकातें
समय के साथ, हम और भी साहसी होने लगे। खुशी ने अपनी कल्पनाएं साझा कीं और हमने उन्हें पूरा किया।
एक बार, उसने कहा कि वह सार्वजनिक स्थान पर कुछ करना चाहती है। हम एक मूवी हॉल गए – लेट नाइट शो, लगभग खाली थिएटर। हम लास्ट रो में बैठे और फिल्म के बीच में मैंने उसके कपड़ों के अंदर हाथ डाल दिया।
“आर्यन, यहां नहीं…” वह शर्मा रही थी, लेकिन रोक नहीं रही थी।
मैंने उसकी पैंटी के साइड से हाथ डाला और उसकी योनि में उंगली करने लगा। वह गीली थी और अपने कराहने को नियंत्रित कर रही थी। मैं उसकी क्लिट रगड़ रहा था और वह अपनी सीट पर कसमसा रही थी।
“कृपया… अब रुक… मैं झड़ने वाली हूं…” वह फुसफुसाते हुए कहती।
मैंने गति बढ़ाई और वह चुपचाप संभोग कर गई। उसके बाद हम थिएटर से निकल गए और घर जाकर असली सेक्स किया।
एक और बार, उसने कहा कि वह थ्रीसोम के बारे में सोच रही है। “लेकिन सिर्फ लड़की के साथ,” वह कहती। “मैं नहीं चाहती कि कोई और लड़का हो।”
मैंने एक दोस्त को अप्रोच किया – रिया, मेरी एक्स। विडंबना यह कि रिया ने हां कह दिया। हम तीनों ने एक रात बिताई और वह अनुभव अलग ही था। खुशी और रिया ने एक-दूसरे के साथ किया और मैं दोनों को चोदा।
लेकिन खुशी को सबसे ज्यादा मजा मेरे साथ ही आता। वह कहती थी कि मेरा आकार परफेक्ट है और मैं उसके शरीर को समझता हूं।
“करण तो बस डालके पंप करता है। तू मुझे महसूस करता है,” वह बताती थी।
हमने रोल प्ले भी आजमाए – टीचर-स्टूडेंट, डॉक्टर-पेशेंट, बार में अजनबी। हर कल्पना में वह पूरी तरह से शामिल होती और मुझे और ज्यादा मजा आता।
खुशी की शादी की तारीख तय हो गई – अगले साल मार्च में। तैयारियां शुरू हो गईं – वेन्यू बुकिंग, खानपान, मेहमानों की सूची। करण व्यस्त था अपने काम में और खुशी व्यस्त थी तैयारियों में।
लेकिन वह मुझे छोड़ नहीं पा रही थी। शादी के दो महीने पहले, उसने कहा कि वह मुझे अपनी सुहागरात से पहले आखिरी बार चुदवाना चाहती है।
“इसके बाद मैं करण की पत्नी बन जाऊंगी और वफादार रहना चाहूंगी – कम से कम शारीरिक रूप से,” वह कहती।
मैं समझ गया। यह हमारा आखिरी मौका था। मैंने एक वीकेंड प्लान किया – एक रिसॉर्ट पर, शहर से बाहर। हम दोनों ने अपने माता-पिता को कुछ बहाना देकर निकले।
रिसॉर्ट का कमरा खूबसूरत था – विशाल बिस्तर, जकूजी और निजी बालकनी। हम दोनों ने प्रवेश करते ही चुंबन करना शुरू कर दिया। यह बार भावनात्मक भी था और जोशीला भी। बेस्ट फ्रेंड के साथ मेरी पहली चुदाई
“मैं तुझे कभी नहीं भूलूंगी, आर्यन,” वह कहती और मेरे होठों पर चुंबन करती।
हमने पूरा वीकेंड बिताया – सिर्फ सेक्स और बातें। हमने हर स्थिति आजमाई जो हमने कभी न की हो। मैंने उसकी हर कल्पना पूरी की।
एक रात, हम जकूजी में थे। मैंने उसे वहीं डॉगी स्टाइल में चोदा, पानी के अंदर। वह अनुभव अलग ही था।
“तू बेस्ट है, आर्यन। करण कभी ऐसा नहीं कर सकता,” वह कहती।
आखिरी रात, मैंने उसे धीमा, जोशीला प्रेम-मिलन किया। जैसे कोई जोड़ा करता है जो अलग होने वाला हो। मैंने हर हिस्से को समय दिया – उसके होठों, उसके स्तनों, उसकी योनि। मैं उसके शरीर को अपनी जीभ से एक्सप्लोर करता रहा।
जब मैं उसके अंदर था तो हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में देखते रहे। “आई लव यू,” वह फुसफुसाते हुए कहती। मैंने जवाब नहीं दिया, लेकिन मैंने उसे और ज्यादा कसके गले लगा लिया।
भाग ८: आज की हकीकत
खुशी की शादी हो गई। करण और वह अब पति-पत्नी हैं। मैंने शादी में हिस्सा लिया और दूल्हे के दोस्त बनकर रस्मों में भाग लिया। किसी को कुछ पता नहीं था।
शादी के बाद, खुशी ने शुरुआत में संपर्क कम कर दिया। वह अपनी नई जिंदगी में व्यस्त थी – घर बसाना, सास-ससुर के साथ ढालना आदि।
लेकिन दो महीने बाद, उसने संदेश किया। “आर्यन, मुझे तू चाहिए। मिल सकता है?”
मैंने हां कह दी। वह अब भी मुझसे चुदवाती है – कभी-कभी, जब मौका मिलता है। करण को अब भी कुछ पता नहीं है। वह अपने काम में व्यस्त रहता है और खुशी अपनी “दोस्त” से मिलने जाती है – जो मैं हूं।
कभी-कभी मुझे दोषी महसूस होता है। करण से मेरी दोस्ती थी और मैं उसकी पत्नी के साथ यह कर रहा हूं। लेकिन फिर मैं सोचता हूं कि यह खुशी की पसंद है। वह वयस्क है और वह तय कर सकती है कि उसे क्या चाहिए।
आज भी, जब वह मेरे पास आती है, वह वही जोशीला, जंगली लड़की लगती है। शादी ने उसकी इच्छाएं कम नहीं कीं। अगर कुछ बदला है तो यह कि अब वह और ज्यादा सावधान है – जोखिम अब ज्यादा है।
“कभी सोचा है कि अगर करण को पता चल गया तो?” मैंने एक दिन पूछा।
“सोचा है,” वह बोली। “लेकिन आर्यन, मैं तुझे छोड़ नहीं सकती। तू मेरी कमजोरी है।”
मैं उसकी कमजोरी हूं, या वह मेरी? शायद दोनों एक-दूसरे की कमजोरी हैं। यह रिश्ता जटिल है, अनैतिक है, लेकिन हम दोनों के लिए जरूरी है।
कल फिर उसने संदेश किया था – “कल शाम, ६ बजे, मेरे घर। करण शहर से बाहर है।”
मैं जाऊंगा, जैसे हमेशा जाता हूं। क्योंकि मैं भी उसके बिना नहीं रह सकता। यह गलत है, लेकिन जो मिलता है वह सही लगता है।
यह मेरी कहानी है – एक टूटे दिल से शुरू हुई, एक गुप्त प्रेम संबंध बन गई और अब एक दोषी आनंद है जो हम दोनों छोड़ नहीं पा रहे। बेस्ट फ्रेंड के साथ मेरी पहली चुदाई
खुशी आज भी करण की पत्नी है और आज भी मेरी प्रेमिका है। और मैं… मैं आज भी उसका गुप्त प्रेमी हूं, जो उसे चोदता है, प्यार करता है और उसके साथ वह सब करता है जो एक पति को करना चाहिए।
लेकिन यह जिंदगी है। उलझी हुई, जटिल और खूबसूरत।
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